Wednesday, May 18, 2011

खो जाऊ?

बचपन में जब mom को काम होता था तो वो हमें खेलने को छोड़ देंती थी. और हम घर से बहार निकल जाते थे अनजाने रास्तो पर. बोहोत अच्छा लगता था खो जाना. नए रास्तो पे खुदको अकेला छोर देती थी. अनजाने को जानने की ग़जब सी खुसी मिलती थी. पर कभी वि खो नहीं जाती थी. हमेसा सही समई पर घर वापस आ जाती थी.
आज मौसम बड़ा अच्छा है. रात को बारिश हुई. रस्ते कही कही अभी भी भींगे हुए हैं. हवा में ठंडक है, अगर भी गर्मी भी महसूस हो रही है. आज बचपन के उन दिनों में लौटने का मन कर रहा है :)
कभी कभी अच्छा होता है, खो जाना :)