Sunday, May 27, 2012

"जो पुरुष सब  कर्मों को परमात्मा में अर्पण  करके  और आसक्ति रहित हो कर  कर्म  करता है वो जल से कमल के पत्ते के भाँती पाप से लिप्त नहीं होता ." -- Geeta, 5th chapter
तेरा अधिकार केवल कर्म पर है कर्मफल पर नहीं, इसलिए तू कर्मफल का हेतु मत बन,ना ही कर्महीनता में तेरी आसक्ति हो.